लज्ज़त-ए-गम बढ़ा दीजिये,
आप फिर मुसकुरा दीजिये,
चाँद कब तक ग्रहण में रहे,
अब तो जुल्फें उठा दीजिये,
मेरा दमन बहुत साफ़ है,
कोई तोहमत लगा दीजिये,
आप अंधेरे में कब तक रहेंगे,
फिर कोई एक घर जला दीजिये....
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urdu ghazals, shayari.
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