Friday, May 29, 2009

qateel shifai ki shayyiri

तुम पूछो और मैं न बातों, ऐसे तोह हालत नही
एक ज़रा सा दिल टूटा है, और तोह कोई बात नही
किसको ख़बर थी सांवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैं
सावन आया लेकिन अपनी किस्मत में बरसात नही
माना जीवन में औरत एक बार मोहब्बत करती है
लेकिन मुझको ये तोह बता दे क्या तू औरत-जात नही
ख़त्म हुआ मेरा अफसाना अब ये आंसू पोंछ भी लो
जिस में कोई तारा चमके आज की रात वो रात नही
मेरे ग़मगीन होने पर एहबाब हैं यु हैरान 'क़तील'
जैसे मैं पत्थर हूँ, मेरे सीने में जज़्बात नही

No comments:

Post a Comment