lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Friday, May 29, 2009
jigar Muradabadi ki shayyiri
इश्क
को
बेनकाब
होना
था
आप
अपना
जवाब
होना
था
तेरी
आँखों
का
कुछ
कसूर
नही
हाँ
,
मुझी
को
ख़राब
होना
था
दिल
की
जिस
पर
है
नक्श
-
ऐ
-
रंग
-
रंग
उसको
सदा
किताब
होना
था
हमने
नाकामियों
को
ढूंढ
लिया
अखिराश
कामयाब
होना
था
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