lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Friday, May 29, 2009
gulzar ki shayyiri
शाम
से
आँख
में
नमी
सी
है
आज
फिर
आपकी
कमी
सी
है
दफ़न
कर
दो
हमें
की
साँस
मिले
नब्ज़
कुछ
देर
से
थमी
सी
है
वक्त
रहता
नही
कहीं
छुपकर
इसकी
आदत
भी
आदमी
सी
है
कोई
रिश्ता
नही
रहा
फिर
भी
एक
तस्लीम
लाज़मी
सी
है
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