शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है
दफ़न कर दो हमें की साँस मिले
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है
वक्त रहता नही कहीं छुपकर
इसकी आदत भी आदमी सी है
कोई रिश्ता नही रहा फिर भी
एक तस्लीम लाज़मी सी है
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urdu ghazals, shayari.
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