Monday, April 13, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

शुज़ूदे शोके मोहोम्मद जो तूल हो जाये
मुझे यकीन है रहमत नुज़ूल हो जाये
इस एहतमाम से करना सबाल आका से
न कोई बात ज़बा से फुज़ूल हो जाये
ये मेरे दिल की तमन्ना है ये ही हसरत है
ये मेरा जिस्म मदीने की धूल हो जाये
pado नमाज़ pado मोमिनों नमाज़ pado
न जाने कोन सा सजदा कुबूल हो जाये
जो गुज़रे इश्के नबी में हयात राही की
कसम खुदा की तो कीमत बसूल हो जाये

No comments:

Post a Comment