राहे हक में हक के निज़ाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
बा खुदा खुदा के कलाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
मिटा जा रहा था जहान से बहा नाम दीने रसूल का
लहु दे के दीन के नाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
न अज़ान होती कभी कही न नमाज़ होती कभी कही
हें ये सच के फरज़े तमाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
कभी बे ज़बान के खून से कभी नो ज़बान के खून से
बा खुदा दरुदो सलाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
बड़ी तेज कुफ्र की आंधिया चली राही फिर भी ये देखिये
के चरागे मस्जिदे आम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
Monday, April 13, 2009
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