lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Thursday, June 4, 2009
wajeeh irfani ki shayyiri
गुंचा-ऐ-शौक़ लगा है खिलने
फिर तुझे याद किया है दिल ने
दास्ताने हैं लब-ए-आलम पर
हम तो चुप चाप गए थे मिलने
मैंने छुप कर तेरी बातें की थी
जाने कब जान लिया महफिल ने
अंजुमन अंजुमन आराइश[decoration] है
आज हर चाक लगा है सिलने
No comments:
Post a Comment
‹
›
Home
View web version
No comments:
Post a Comment