वो मिले तो गोया ये हाल था के न था जुदाई का ग़म कभी
वो गए तो ऐसा गुमां हुआ के बहम हुए थे न हम कभी
मुझे याद है वो सम्मा अभी मेरी ज़िन्दगी भी थी ज़िन्दगी
तुझे याद है मेरे हाल पर थी तेरी निगाह-ऐ-करम कभी
तू ही आके खल्वत-ए-नाज़ से इन्हें अफियात का पयाम दे
के तेरे बगैर न मिट सकेगा फसाद-ए-दिएर-ओ-हरम कभी
No comments:
Post a Comment