अभी वोह दर्द बाकी है
अगरचे वक्त मरहम है
मगर कुछ वक्त लगता है
किसी को भूल जाने में
दोबारा दिल बसने में
अभी कुछ वक्त लगना है
अभी वोह दर्द बाकी है
में कैसे नई उल्फत में
अपनी जात को गुम कर दूँ
के मेरे जिस्म-ओ-वज्दां में
अभी वोह फर्द बाकी है
अभी उस शख्स की मुझ पर
निगाह-ए-सर्द बाकी है
अभी तो इश्क के रास्तों की
मुझ पर गर्द बाकी है
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