lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Saturday, June 6, 2009
unknown
तू मुझे जो कब से मिला नही, तू ही दिल से मेरे गया नही
मैं हूँ रोज़ मिलती कितनो से मगर वैसी चाह तो कोई नही
वो जो तेरा जो लहजा-ए-गुफ्तगू मुझे दुसरे में मिला नही
मेरी हर पसंद थी तुझे पसंद, एक ही बात मुझे अब तक भूलती नही
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