lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Saturday, June 6, 2009
unknown
खफा खफा से
लगते हो
जुदा जुदा से
लगते हो
कहा ये एक
पुजारी ने
खुदा खुदा से
लगते हो!
रखो जो सर पर
ओढनी!
हया हया से
लगते हो!
मिलो जो मुसकुरा के तुम
अदा अदा से
लगते हो!
ये दिल है
एक चमन
और तुम
सबा सबा से लगते हो
नहीं हो बेवफा मगर
ज़रा ज़रा से
लगते हो!
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