आतिश-ए-हिज्र और मैं हूँ
मुसलसल सब्र है और मैं हूँ
कभी तो आ के खुशी मेरे आँगन बरसेगी
अभी तो बस अबर है और में हूँ
सामने तू है और मेरे लबों पे मुस्कराहट
दिल पर एक जबर है और में हूँ
इतना तन्हा हो चुका हूँ
जिंदगी कब्र है और मैं हूँ....
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