lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Saturday, June 6, 2009
unknown
हिजर की बददुआ न हो जाना,
देख लेना सज़ा न हो जाना,
मोर तो बेशोमर आएँगे,
थक न जाना जुदा न हो जाना,
बेइरादा सफर पे निकल हो,
रास्तों की हवा न हो जाना,
इक
तुम
ही
को
खुदा
से
माँगा
है
,
तुम
कहीं
बेवफा
न
हो
जाना
तुम कहीं बेवफा न हो जन.......
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