lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Monday, June 1, 2009
unknown
मेरे गम का साथी, मेरे बख्त[luck] का सितारा
तेरी आरजू ने लूटा, तेरी जुस्तजू ने मारा
मैं बिसात-ऐ-ज़िन्दगी[game of life] पर गम की बाज़ी
कभी उनकी शह पे जीता, कभी दिल की शह पे हरा
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