बेरुखी बढ़ जायेगी तू बेवफा हो जाएगा
क्या ख़बर थी मुझसे तू इतना ख़फा हो जाएगा
तुने इतना भी न सोचा छोड़ कर जाते हुए
तेरे बिना कितना कोई बे_असर रह जाएगा
किस ने जाना था बनेगा जब हमारा आशियाँ
सारा गुलशन बिजलीओं के हमनवा हो जाएगा
इक ज़रा सी बेवफाई भी सही जाती नहीं
देखना यह दर्द ही एक दिन दवा हो जाएगा
सोचता हूँ मैं शमा सहर की तरह कांप के
मुझसे तू बिछडा तोह 'इश्क' जाने क्या हो जाएगा
No comments:
Post a Comment