lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Tuesday, June 2, 2009
unknown
जालिम था वोह और जुलम की आदत भी बोहत थी,
मजबूर थे हम उससे मोहब्बत भी बोहत थी,
वाकिफ ही न था रस्म-ए-मोहब्बत से वोह वरना,
दिल के लिए थोडी सी इनायत भी बोहत थी,
यूँ ही नहीं मशहूर-ए-ज़माना कातिल मेरा,
उस शख्स को इस फेन में महारत भी बोहत थी...
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