आता है किस अंदाज़ से टूक, नाज़ तो देखो
किस धज से कदम पड़ता है, अंदाज़ तो देखो
करता हु मैं दुज्दीदा नज़र, गर कभी उस पर
नज़र मैं परख ले है, बाज तो देखो
मैं कंगूरा-ये- अर्श से, पर मार ke गुज़रा
अल्लाह रे रसाई-ये-परवाज तो देखो
अबतार है ये दीवान तो मियाँ 'मुसहफी' सारा
अंजाम को कया कहते हो, आगाज तो देखो
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