lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Thursday, June 4, 2009
jigar Muradabadi ki shayyiri
साकी पर इल्जाम न आए
चाहे तुझ तक जाम न आए
तेरे सिवा जो की हो मुहब्बत
मेरी जवानी काम न आए
जिनके लिए मर भी गए हम
वो चल कर दो गाम न आए
इश्क का सौदा इतना गरां[difficult] है
इन्हें हमसे काम न आए
मैखाने में सब ही तो आए
लेकिन "जिगर" का नाम न आए
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