lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Saturday, May 30, 2009
unknown
मेरे पाऊँ मैं कभी हालत की ज़ंजीर न हो
मेरे ख्वाबों की भयानक कहीं ताबीर न हो
है कुर्बतों का ये मौसम पर ऐतबार नही
तुझसे मिल कर ही बिछड़ना मेरी तकदीर न हो
मांगी हैं दुआ'एँ के वोह सदा साथ रहे
ये और बात है मेरी दुआ मैं तासीर न हो
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