lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Friday, May 29, 2009
qateel shifai ki shayyiri
चराग बन के जला जिसके वास्ते इक उमर
चला गया वो हवा के सपुर्द कर के मुझे
मैं अपनी जात में नीलम हो गया हूँ 'क़तील'
ग़म-ऐ-हयात से कह दो खरीद ले मुझे
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