lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Friday, May 29, 2009
khumar barabanqwi ki shayyiri
तेरे
दर
से
उठ
कर
जिधर
जाऊं
मैं
चलूँ
दो
क़दम
और
ठहर
जाऊं
मैं
अगर
तू
ख़फा
तोह
परवाह
नहीं
तेरा
ग़म
ख़फा
हो
तोह
मर
जाऊं
मैं
तबस्सुम
ने
इतना
ड
शा
है
मुझे
कली
मुस्कुराये
तोह
डर
जाऊं
मैं
संभाले
तोह
हूँ
ख़ुद
को
तुझ
बिन
मगर
जो
छू
ले
कोई
तोह
बिखर
जाऊं
मैं
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