lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Friday, May 22, 2009
insha khan insha ki shayyiri
जो'फ आता है दिल को थाम तो लो
बोलीयों मत, मगर सलाम तो लो
कौन कहता है बोलो, मत बोलो
हाथ से मेरा एक जाम तो लो
इन्ही बातों पे लुटा हूँ मैं
गाली फिर दे के मेरा नाम तो लो
याक निगाह पर बिकेहैं "इंशा" आज
मुफ्त में मोल एक गुलाम तो लो
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