lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Friday, May 22, 2009
fazal taabish ki shayyiri
तमन्ना का सर यूं उतारा गया
हर एक बीच रस्ते में मारा गया
मैं किस किस की आवाज़ पर दौड़ता
मुझे चौ-तरफ से पुकारा गया
वहां ज़ख्म पर बात ही कब हुई
फ़क़त आंसुओं को शुमारा गया
हवस थी उसे मेरी हर चीज़ की
मगर मुझसे सब कुछ न हारा गया
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