नसीब आजमाने के दिन आ रहे हैं
करीब उनंके आने के दिन आ रहे हैं
जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है
सब उनको सुनाने के दिन आ रहे हैं
अभी से दिल-ओ-जान सर-ऐ-राह रख दो
के लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं
टपकने लगी उन् निगाहों से मस्ती
निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं
सबा फिर हमें पूछती फिर रही है
चमन को सजाने के दिन आ रहे हैं
चलो 'फैज़' फिर से कहीं दिल लगाये
सुना है ठिकाने के दिन आ रहे हैं
Friday, May 29, 2009
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