जब लोग ही जज्बों की तौकीर नही करते,
हम भी कोई दुःख अपना तहरीर नही करते
दिल चीर जाता है लहजा का ये रुखापन
करती हैं जुबां वो कुछ जो तीर नही करते
लिखते हैं वही जो कुछ हर इक पे गुज़रती है
परियों की कहानी हम तहरीर नही करते
इस दौर में हम उन्को कह्ते हैं मुफकिर
जो तनकीद तोह करते हैं पर तदबीर नही करते
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