lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Thursday, April 16, 2009
भले किसी और की जागीर थी वो
पर मेरे ख्वाबो की तस्वीर थी वो
मुझे मिलती तो कैसे मिलती वो..........
किसी और के हिस्से की तकदीर थी वो.........
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