lucknow k nawab ki shayyiri
urdu ghazals, shayari.
Monday, November 24, 2008
unknown
ताल्लुक तोड़ता हूँ तोह मुकमल तोड़ देता हूँ !
जिसे मैं छोड़ देता हूँ मुकमल छोड़ देता हूँ !
यकीन रखता नहीं मैं किसी कचे ताल्लुक पर !
जो धागा टूटने वाला हो, उसको तोड़ देता हूँ !
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