Tuesday, June 2, 2009

unknown

सवाल पूछे जाये तो जवाब नहीं मिलता
वक्त से मांगो तो हिसाब नहीं मिलता
हसीनों से मांगो तो प्यार नही मिलता
बिना हुस्न के इश्क का, खिताब नही मिलता
दिल तो मिलते है, दिल-ए-बेताब नही मिलता
अंधेरों में जो निकले, वो अफताब नही मिलता
ग़म-ए-इश्क छुपाने को नकाब नही मिलता
रात तो हो जाती है, मगर ख्वाब नही मिलता
दोस्त मिल जाते है, तो ‘सादिक’ नही मिलता
अंजाम मिल जाते है, तो आगाज़ नही मिलता

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