मिलना था इत्तेफाक बिछड़ना नसीब था
वो इतना ही दूर हो गया जितना करीब था
मैं उस के मिलने को तरसता ही रह गया
जिस शख्स की हथेली में मेरा नसीब था
बस्ती के सारे लोग ही आतिश-परस्त थे
घर जल रहा था मेरा समंदर करीब था
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urdu ghazals, shayari.
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