Saturday, June 6, 2009

unknown

अपनी खातिर जागे हो, सोये हो
अपनी खातिर हँसे हो रोये हो
किस लिए आज खोये खोये हो
तुमने आंसू बोहत पीये अपने
तुम बोहत साल रह लिए अपने
अब मेरे सिर्फ़ मेरे हो के रहो

हुस्न ही हुस्न हो ज़हानत हो
इश्क हूँ मैं तोह तुम मुहबत हो
तुम मेरी बस मेरी अमानत हो
जी लिए जिस कदर जीये अपने
तुम बोहत साल रह लिये अपने
अब मेरे सिर्फ़ मेरे हो के रहो

रहते हो रंज-ओ-ग़म के घेरों में
दुःख के असिब के बसेरों में
तुमको दे दूंगा सब दीये अपने
तुम बोहत साल रह लिये अपने
अब मेरे सिर्फ़ मेरे हो के रहो

तुम अज़ल से दुखों के डेरे हो
चाहे खुदको ग़मों से घेरे हो
जबसे पैदा हुए हो मेरे हो
आज खोलेंगे लब सीये अपने
तुम बोहत साल रह लिये अपने
अब मेरे सिर्फ़ मेरे हो के रहो

दिल की हर बात दिल से कहने दो
मेरी बाहों में खुदको बहने दो
मुद्दतों ज़ख्म ख़ुद सहे अपने
तुम बोहत साल रह लिये अपने
अब मेरे सिर्फ़ मेरे हो के रहो

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