इश्क फ़ना का नाम है इश्क में ज़िन्दगी न देख
जलवा-ए-अफताब बन ज़र्रे में रोशनी न देख
शौक़ को रहनुमा बना जो हो चुका कभी न देख
आग दबी हुई निकाल आग बुझी हुई न देख
तुझको खुदा का वास्ता तू मेरी ज़िन्दगी न देख
जिस की सहर भी शाम हो उसकी सियाह शावी न देख
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