सब से नीराला सब से ही बेहेतर बना दीया
नीस्वत ने तेरी मेरा मुकद्दर बना दीया
हीरा बना दीया कही गोहर बना दीया
हर कादरी गुलाम को बेहेतर बना दीया
मैने जीबी झुकाई खुदा तेरे सामने
तूने मेरी जीबी को मुनब्बर बना दीया
में के रहा हू तेरे ही कदमो को चूम कर
कतरे को छूके तू ने समंदर बना दीया
जब से मीली है खाके कदम मुझको पीर की
तारीखीऔ में मुझको मुनब्बर बना दीया
कदमो ने मेरे पीर के हर एक वक्त का
में के रहा हू मुझको सीकंदर बना दीया
मुर्शीद ने अपनी चश्मे इनायात के फेज़ से
राही मेरे नसीव को वर्तर बना दीया
Monday, April 13, 2009
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