Wednesday, April 15, 2009

buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri

कभी दर्दे - दिल कि दवा चाहता हूँ
कभी रोग इससे सिवा चाहता हूँ
अरे बेवफा सुन मैं क्या चाहता हूँ
खता मैंने कि है सजा चाहता हूँ
जिसे देख कर ज़ख्म दिल के हरे हों
उसे इक नज़र देखना चाहता हूँ

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