मुन्सिफों सलीबों पर फैसले नहीं होते
बेसबब बगावत के सानाहे नहीं होते
झूठ और सदाक़त की जंग तो अज़ल से है
फिर भी सच पे जीने के हौसले नहीं होते
सोच के जुदा होना फिर के मिल न पायेंगे
क्यूंकि इस ज़माने में मोजज़े नहीं होते
जो भी थे गिले शिकवे दूर करके जाना था
कम से कम बिछड़ने पर दिल बुरे नहीं होते
चाँद से कहा हमने तुम ही रात भर जागो
हमसे उस्सकी यादों में रत_जगे नहीं होते
Thursday, June 4, 2009
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