पिछले बरस यह डर था, कही तू जुदा ना हो
अब के बरस दुआं है तेरा सामना ना हो
सामना ना हो गुजरे जिधर से तू, वोह मेरा रास्ता ना
अच्छा मेरी वफाओं का तुने सिला दिया यह कया
किया के खाक़ में मुझको मिला दिया
सुरमा समझ के गैर को आँखों में दी जगह
आंसू समझ के मुझको नज़रों से गिरा दिया
महबूब यूँ किसीका कोई बेवफा ना हो
तेरे सितम कि दास्तान किसको सुनाऊं मैं
तुने दीये जो ज़ख्म वोह किसको दिखाऊं मैं
अब ऐसे मोड़ पर है मेरी ज़िन्दगी जहाँ
यह भी बहुत है अगर तुझको भूल जाऊं मैं
जो मुझसे हुई ऐसी किसीसे खता ना हो
तीरथ नही है जिसमें वोह सूरत फिजूल है
खुशबु अगर ना हो तोः वोह कागज़ का फूल है
यह दिल कभी ना धड़केगा अब तेरे नाम से
तेरा उसूल है तो मेरा भी उसूल है
इस ज़िन्दगी में तुझसे कभी वास्ता ना हो
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