जिन रास्तों से तुम आए हमारे दिल तक
उन रास्तों से किसी को गुजरने नहीं दिया
बैठी हूँ आज भी मैं वक्त थाम कर
मैंने उससे भी फ़ैसला करने नहीं दिया
इन् हाथों की लकीरों को इस तरह से रखा
हमने तुम्हारे नाम को मिटने नहीं दिया
कागज़ पर अपने दिल के लिखा तेरा नाम और
कलम तोड़ दिया और कुछ नया लिखने नही दिया
बारिश है, एक लड़की है और खुली सड़क
लेकिन तेरे ख्याल ने बिखेरने नहीं दिया
कोई तो है जिस की हर दुआ में मैं हूँ
इस एक गुमां ने मुझे मरने नहीं दिया
Saturday, June 6, 2009
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