मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने
अब गुज़रेगा मेरे साथ ज़माने कितने
मैं गिरा था तो बहुत लोग रुके थे लेकिन
सोचता हूँ मुझे आये थे उठाने कितने
जिस तरह मैंने तुझे अपना बना रखा है
सोचते होंगे यही बात नाजाने कितने
तुम नया ज़ख्म लगाओ तुम्हे इससे कया है
भरने वाले हैं अभी ज़ख्म पुराने कितने
*
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