याद उसकी मैं भला दिल से भुलाऊं कैसे
रूठी किस्मत को मनाऊं तोह मानों कैसे
अपना वडा था जियेंगे मरेंगे तोह साथ
अब अकेला ही तुझे छोड़ के जाऊं कैसे
दिल में पैवस्त हैं यादें तेरी अब मिस्ले शजर
उस्सकी शाखों से मैं दामन को छुडाऊँ कैसे
उसने आंखों में मेरी अपना बनाया है घर
नींद के अजनबी साए को बुलाऊं कैसे
हमने नज़रों के तसादुम से जो पी थी एक बार
दिल पे बरसों से नशा सा है हटाऊं कैसे
दिल पे काबू न रहा और न ही सबर-ओ-करार
इस तज़ब जुब में भला चैन मैं पाऊँ कैसे
चाँद का रुख पे असर महजबीं है दिलबर
बे-वफ़ा है वो यकीन सब को दिलाऊं कैसे
दिल से मिटती नही खुशनूद मुहब्बत उनकी
तुम कहो गैर से दिल अपना मैं लगाऊं कैसे
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment