दिल हुसन के शोलों में जला क्यूँ नही देते ?
तुम मुझको मुहब्बत की सज़ा क्यूँ नही देते ?
भीगी हुई पलकों से गुज़र जाते हो चुप चाप
जो दिल पे गुजरी है बता क्यूँ नही देते ?
रोया रोया के गुजारोगे शब्-ऐ-हिज्र कहाँ तक ?
तुम उन्की मुहब्बत को भुला क्यूँ नही देते ?
ऐ फूल से चेहरों ज़रा ये तोह बता दो
तुम दर्द तोह देते हो दावा क्यूँ नही देते ?
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