तुम्हारी मस्त नज़र अगर इधर नही होती
नशे में चूर फिजा इस कदर नही होती
तुम्हीं को देखने की दिल में आरजू है
तुम्हारे आगे ही और ऊंची नज़र नही होती
ख़फा न होना अगर बढ़के थम लूँ दमन
ये दिल-फरेब खता जानकर नही होती
तुम्हारे आने तलक हमको होश रहता है
फिर उसके बाद हमें कुछ ख़बर नही होती
Friday, May 29, 2009
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