धुप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
वो सितारा है चमकने दो युही आंखों में
क्या ज़रूरी है उससे जिस्म बना कर देखो
पत्थरों में भी जुबा होती है, दिल होते हैं
अपने घर की दर-ओ-दीवार सजा कर देखो
फासला नज़रों का धोखा भी तोह हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो
Friday, May 29, 2009
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