आज भी हैं मेरे क़दमों के निशान आवारा
तेरी गलियों में भटकते थे जहाँ आवारा
तुझसे क्या बिछडे तोह ये हो गई अपनी हालत
जैसे हो जाए हवाओं में धुंआ आवारा
मेरे शेरों की थी पहचान उसी के दम से
उसको खो कर हुए बेनाम-ओ-निशान आवारा
जिसको भी चाह उससे टूट के चाह 'राशिद'
कम मिलेंगे तुम्हे हम जैसे यहाँ आवारा
Friday, May 29, 2009
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