दाग दुनिया ने दिए ज़ख्म ज़माने से मिले
हमको ये तोहफे तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले
ख़ुद से मिल जाते तोह चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले
कैसे माने के उन्हें भूल गया तू ऐ 'कैफ'
उन्के ख़त आज हमें तेरे सरहाने से मिले
Saturday, May 30, 2009
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