में लीखु शाने करामत तेरी गोसे आज़म
काश मील जाये इज़ाज़त तेरी गोसे आज़म
सब से आला है बीलायत तेरी गोसे आज़म
दोनों आलम में है अज़मत तेरी गोसे आज़म
तुने अल्लाह की कुदरत से जीला-ऐ मुर्दे
तू है अल्लाह का कुदरत तेरी गोसे आज़म
ये मुझे माँ की दुआओं का असर लगता है
मील गई जो मुझे नीस्बत तेरी गोसे आज़म
इब्ने मरीयम सी जो बनती हुई हमसर देखी
बो करामत है करामत तेरी गोसे आज़म
बा खुदा मानी है मानी है बहुत शेताने
नहेरे दज़ला पे इबादत तेरी गोसे आज़म
खुद बा खुद मेरे बुलंदी ने कदम चूम लीये
हो गई जब से इनायत तेरी गोसे आज़म
बो तबंगर का तबंगर है ज़माने भर में
मील गई जीस को भी दोलत तेरी गोसे आज़म
फीक -रे उक्बा नहीं इस वास्ते राही को तेरे
दील के शीशे में है सूरत तेरी गोसे आज़म
Wednesday, April 15, 2009
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