Monday, April 13, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

मेरी केसे ज़माने में शोहरत हुई
में तो कुछ भी नहीं - में तो कुछ भी नहीं
बा खुदा ये नवी की बदोलत हुई
में तो कुछ भी नहीं - में तो कुछ भी नहीं

आपने अपने हलके में अपना लीया
आपने अपने कदमो से lipta लीया
या हुसैन आप की ये इनायात हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

बस इसी बात पर में तो इतरा गया
बस इसी बात पर में तो इठला गया
माँ के कदमो तले मेरी जन्नत हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

मर्सीए नात मुझ से जो लीखबा लीये
क्या हकीकत बताऊ ज़माने को में
नन् ने असगर की नज़रे इनायात हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

राही केसे गुलामो में चाहत मीली
राही केसे सलामो में अज़मत मीली
शाहे करबल की ये तो करामत हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

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