अँधेरा ज़हन का सिम्त ए सफ़र खोने लगता है
किसी का ध्यान आता है उजाला होने लगता है
किसी ने रख दिए ममता भरे दो हाथ क्या सर पर,
मेरे अंदर कोई बच्चा बिलख कर रोने लगता है
Thursday, April 16, 2009
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urdu ghazals, shayari.
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