Monday, April 13, 2009

shardha ki shayyiri

दिल में जब प्यार का नशा छाया
पंछी पिंजरे में खुद चला आया
सह गया जो ख़िजां के ज़ोर–ओ-खम
गुल उसी पेड़ पर नया आया
सबको कह देगा, आँख का काजल
मेरे दिल ने कहाँ सकूँ पाया
क़ैद-ए-सरहद से है वफ़ा आज़ाद
राज़ ये बादलों ने समझाया
आके पहलू में बैठ जा मेरी
“श्रद्धा” अब तो है बस तेरा साया

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