मेरी गज़लों में ढल गया होगा
जाने कितना बदल गया होगा
धुप सर पर उतर गयी होगी
चाँद चेहरे का ढल गया होगा
बेसबब अश्क बह नहीं सकते
कोई पत्थर पिघल गया होगा
रास्तों को वो जानता कब था
पाँव ही था फिसल गया होगा
मंजिलें दूर क्यूँ हुई है 'निजाम'
रस्ता रस्ता बदल गया होगा
Saturday, January 17, 2009
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