Monday, November 24, 2008

unknown

तेरी इब्तदा कोई और है तेरी इन्तहा कोई और है !!
तेरी बात हमसे हुई कया, तेरा मुद्दा कोई और है !!
हमें शौंक था बड़ी देर से के तेरे शरीक_ए_सफ़र बने !!
तेरे साथ चल के खबर हुई तेरा रस्ता कोई और है !!
तुझे फिकर है के बदल दिया मुझे गर्दिश_ए_सफ़र रोज़ ने !!
कभी खुद से भी तो सवाल कर तू वही है या कोई और है !!

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